शक्ति की विजय
मान्यता है कि माँ दुर्गा ने नौ रात्रि तक महिषासुर से युद्ध किया और दसवें दिन उसका वध किया। इसी विजय का पर्व विजयादशमी कहलाता है।
हमारी सामूहिक नवरात्रि पूजा ११ अक्टूबर २०२६ से शुरू हो चुकी है। ₹२१, ₹५१ या ₹१०१ का चढ़ावा चुनें और अपने नाम-गोत्र से पूजा में शामिल हों।
दूर रहकर भी माँ के दरबार से जुड़ें। आपकी ओर से पंडित जी आपके नाम-गोत्र से संकल्प लेकर पूरे विधि-विधान से पूजा करेंगे।
“या देवी सर्वभूतेषु शक्तिरूपेण संस्थिता”

किसी भी देवी स्वरूप पर क्लिक करें और उस दिन की पूजा में जुड़ें
नवरात्रि का अर्थ है ‘नौ रातें’। ये नौ दिन माँ दुर्गा के नौ स्वरूपों, शैलपुत्री से सिद्धिदात्री तक, की उपासना को समर्पित हैं।
वर्ष में चार नवरात्रि आती हैं: चैत्र, आषाढ़ (गुप्त), शारदीय और माघ (गुप्त)। इनमें चैत्र और शारदीय नवरात्रि सबसे प्रमुख हैं।
शारदीय नवरात्रि आश्विन मास के शुक्ल पक्ष में मनाई जाती है और विजयादशमी पर पूर्ण होती है।
मान्यता है कि माँ दुर्गा ने नौ रात्रि तक महिषासुर से युद्ध किया और दसवें दिन उसका वध किया। इसी विजय का पर्व विजयादशमी कहलाता है।
कथाओं के अनुसार श्रीराम ने रावण से युद्ध से पहले शक्ति की आराधना की थी। इसलिए नवरात्रि के बाद दशहरा मनाया जाता है।
शरद ऋतु के आरंभ में मौसम बदलता है। इस समय उपवास, जप और साधना से तन-मन की शुद्धि और नई ऊर्जा मानी गई है।
हर तीन दिन एक देवी-शक्ति को समर्पित
नकारात्मकता और बाधाओं का नाश
१ · २ · ३सुख, समृद्धि और सौभाग्य
४ · ५ · ६ज्ञान, विवेक और सिद्धि
७ · ८ · ९
नवरात्रि की शुरुआत घटस्थापना से होती है। पहले दिन शुभ मुहूर्त में कलश की स्थापना हुई और माँ दुर्गा का आवाहन किया गया। अब पूरे नौ दिन पंडित जी पूजा का क्रम चला रहे हैं और आपके नाम से संकल्प लेकर आपको भी इसमें शामिल करेंगे।
किसी भी दिन का चढ़ावा ₹२१, ₹५१ या ₹१०१ में से चुनें और अपने नाम से सेवा अर्पित करें।

नवरात्रि का पहला दिन पर्वतराज हिमालय की पुत्री माँ शैलपुत्री को समर्पित है। इसी दिन शुभ मुहूर्त में घटस्थापना कर माँ का आवाहन किया जाता है।
ॐ देवी शैलपुत्र्यै नमः

माँ ब्रह्मचारिणी तपस्या और संयम की देवी हैं। इनकी पूजा से धैर्य और आत्मबल बढ़ता है।
ॐ देवी ब्रह्मचारिण्यै नमः

माँ चंद्रघंटा के मस्तक पर घंटे के आकार का अर्धचंद्र है। इनकी कृपा से भय दूर होता है और मन को शांति मिलती है।
ॐ देवी चन्द्रघण्टायै नमः

मान्यता है कि माँ कूष्मांडा की मंद मुस्कान से सृष्टि की रचना हुई। इनकी पूजा स्वास्थ्य और तेज प्रदान करती है।
ॐ देवी कूष्माण्डायै नमः

भगवान स्कंद (कार्तिकेय) की माता होने से ये स्कंदमाता कहलाती हैं। संतान सुख और परिवार की रक्षा के लिए इनकी पूजा की जाती है।
ॐ देवी स्कन्दमातायै नमः

माँ कात्यायनी को योग्य वर-वधू और मंगल विवाह की कामना के लिए पूजा जाता है। इन्हें शक्ति का उग्र रूप भी माना जाता है।
ॐ देवी कात्यायन्यै नमः

माँ कालरात्रि का स्वरूप उग्र है, पर वे सदैव शुभ फल देती हैं। इनकी पूजा से भय, नकारात्मकता और बुरी नज़र का प्रभाव कम होता है।
ॐ देवी कालरात्र्यै नमः

अष्टमी के दिन पूजी जाने वाली माँ महागौरी शुद्धता और सौभाग्य की प्रतीक हैं। मान्यता है कि इनकी कृपा से पिछले कष्ट धुल जाते हैं।
ॐ देवी महागौर्यै नमः

नवमी पर माँ सिद्धिदात्री की पूजा और पूर्णाहुति के साथ नौ दिन का अनुष्ठान संपन्न होता है। ये सभी सिद्धियाँ प्रदान करने वाली मानी जाती हैं।
ॐ देवी सिद्धिदात्र्यै नमः
जिस दिन की पूजा में जुड़ना चाहें उसे चुनें, ₹२१, ₹५१ या ₹१०१ में से अपनी श्रद्धा अनुसार चढ़ावा चुनें और नाम-गोत्र दें।
आपके नाम से संकल्प लिया जाएगा और पूजा-हवन विधि-विधान से संपन्न होगा।
पूजा का वीडियो WhatsApp पर भेजा जाएगा और प्रसाद आपके पते पर पहुँचेगा।
आप अपनी श्रद्धा अनुसार ₹२१, ₹५१ या ₹१०१ का चढ़ावा चुन सकते हैं। आप एक या एक से अधिक दिन की पूजा में जुड़ सकते हैं।
जी हाँ, हमारी सामूहिक नवरात्रि पूजा ११ अक्टूबर २०२६ से शुरू हो चुकी है। आप आज की पूजा और आने वाले दिनों की पूजा में जुड़ सकते हैं।
अपना दिन और चढ़ावा चुनें, नाम-गोत्र और मनोकामना भरें और सुरक्षित भुगतान करें। आगे की विधि पंडित जी करेंगे।
नहीं। पंडित जी आपके नाम-गोत्र से संकल्प लेकर पूजा करते हैं, और पूजा का वीडियो आपको WhatsApp पर भेजा जाता है।
बीते हुए दिन की पूजा संपन्न हो चुकी है। आप आज की या आने वाले दिनों की पूजा में अपने नाम से जुड़ सकते हैं।