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करवा चौथ का व्रत सुहागिन महिलाएं अपने पति की दीर्घायु, अच्छे स्वास्थ्य एवं सुखी दांपत्य जीवन की कामना से श्रद्धापूर्वक रखती हैं। इस दिन करवा माता, भगवान शिव, माता पार्वती, भगवान गणेश एवं भगवान कार्तिकेय का विधिपूर्वक पूजन किया जाता है।
संध्या के समय करवा चौथ की कथा सुनकर एवं चंद्रमा को अर्घ्य देकर व्रत का पारण किया जाता है। श्रद्धा और विधि-विधान से किया गया यह पूजन दांपत्य जीवन में सुख, प्रेम एवं मंगल की कामना के लिए किया जाता है।
उद्देश्य
- १.पति की दीर्घायु एवं अच्छे स्वास्थ्य की कामना
- २.सुखी एवं समृद्ध वैवाहिक जीवन
- ३.दांपत्य जीवन में प्रेम एवं सौहार्द
- ४.परिवार में सुख-शांति एवं मंगल
करवा चौथ पूजा का शुभ मुहूर्त
करवा चौथ व्रत प्रारंभ — सूर्योदय सेकरवा चौथ पूजा — प्रदोष कालचंद्रोदय के बाद — चंद्रमा को अर्घ्यपंडित द्वारा निर्धारित शुभ समय
ध्यान रखने योग्य
- पूजा से पहले व्रत एवं पूजा सामग्री की तैयारी रखें
- करवा माता एवं भगवान शिव-पार्वती का विधिपूर्वक पूजन करें
- करवा चौथ की कथा श्रद्धापूर्वक सुनें
- चंद्रोदय के बाद चंद्रमा को अर्घ्य देकर व्रत का पारण करें
श्रद्धा एवं विधि-विधान से किया गया करवा चौथ पूजन दांपत्य जीवन की सुख-समृद्धि, प्रेम एवं पति की दीर्घायु की मंगलकामना के लिए समर्पित पावन अनुष्ठान है।
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